उलझन

कभी-कभी दूर तक भटक आता हूँ
सतरंगी सीढ़ी के सहारे दूर उफ़क तक
घूमता हूँ, टहलता हूँ
आवारा बंजारों की तरह
तभी तुम्हारी याद आती है और मैं
तुम्हारी यादों में उलझ जाता हूँ
जैसे अंत में उलझ जाते हैं इन्द्रधनुषी रंग
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उसी उलझी सीढ़ी के सहारे
कोशिश करता हूँ वापस आने की
पर तुम्हारी यादों का सिरा मिलता नहीं.

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