प्रेम की राह

प्रेम की राह

पहाड़ की तरह है

विशाल, अनहद, अपरिमित


इसमें आती हैं

उभर-खाभर और घुमावदार मोड़

मिलते हैं तीक्ष्ण शूल भी

जो कभी वेध देते हैं हृदय तल को

और लहू हो जाता है मन


कहीं दिख जाती हैं चट्टानें भी अडिग

लगता है कि आगे की राह

अब नहीं है संभव


तभी दिख जाते हैं

बुरांश के खूबसूरत फूल

प्रेम का प्रतीक प्योली

नागपुष्प और

कुछ जड़ी बूटियां


जो उम्मीद जगाती हैं कि

जब पत्थर पर भी खिले हैं फूल

तो इस राह में जो भी हासिल होगा

वह अमूल्य होगा

ईश्वरीय होगा।

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