Skip to main content

Posts

Featured

मां

मां  एक नाव के जैसी है रहती सदा मझधार में कर अपने अरमानों को अपने ही भीतर दफ़्न सबके उम्मीदों को पार लगाती खुद रह जाती ताउम्र नदी में और हम  कर महिमामंडित इसे करते उनसे छल! क्यों  केवल मां ही बने महान! पिता भी करके देखे जतन।

Latest posts

प्रेम की भाषा

षड्यंत्र

जो याद रहता है

अकाय

प्रेम की राह

प्रेम

तुम्हारे लिए

मेरे लिए

पोशीदा

नव-सृजन