पिता और मैं
जब कभी बारिश होती थी
पिता
तुम्हारा हाथ आ जाता था मेरे हाथ में
और संभाल लेता था मुझे पहले ही
आसन्न मुश्किलों से,
तुम्हारा हाथ मेरे कंधे पर
देता था हौसला हर पल पग आगे बढ़ने का
मैं आठ साल का था, तुम थे चौवालीस के.
आज फिर बारिश हुयी है
तुम्हारे हाथ का स्पर्श महसूस कर रहा हूँ
तुम्हारा हाथ है मेरे हाथ में
और सीखा है तुमसे ही संभालना
संभलना आसन्न मुश्किलों से,
मेरा हाथ तुम्हारे कंधे पर
दे रहा है तुम्हें तुम्हारा ही हौसला वापस
मैं उन्नतीस का हूँ, तुम हो पैंसठ के.
पिता
तुम्हारा हाथ आ जाता था मेरे हाथ में
और संभाल लेता था मुझे पहले ही
आसन्न मुश्किलों से,
तुम्हारा हाथ मेरे कंधे पर
देता था हौसला हर पल पग आगे बढ़ने का
मैं आठ साल का था, तुम थे चौवालीस के.
आज फिर बारिश हुयी है
तुम्हारे हाथ का स्पर्श महसूस कर रहा हूँ
तुम्हारा हाथ है मेरे हाथ में
और सीखा है तुमसे ही संभालना
संभलना आसन्न मुश्किलों से,
मेरा हाथ तुम्हारे कंधे पर
दे रहा है तुम्हें तुम्हारा ही हौसला वापस
मैं उन्नतीस का हूँ, तुम हो पैंसठ के.
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