चाय

चाय
सिर्फ़ चाय ही नहीं होती
उम्र के हर मोड़ कि
हर-एक यादें
इसमें उबली होतीं हैं

यह
जैसे-जैसे पकती है
वैसे-वैसे घुलती है

जिसमें
रिश्तों में बची हुई मिठास
जितना बोसा होता है।

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