सौरमंडल ( बच्चों के लिए कविता)
सूरज चाचू जागे
बुध ताऊ सरपट भागे
शुक्र सबसे तेज चमका
पृथ्वी पर है जीवन सबका
मंगल हुआ लाल-लाल
बृहस्पति बना सबसे विशाल
शनि ने बनाए छल्ले
अरुण चले चाल उलटे
वरुण के हुए बल्ले बल्ले।
मेरी भावनाएं आकार ले उससे पहले ही उसके गर्भपात हो जाने कि दास्तान, उल्काश्म है. जिसमें मैं हूँ, यकबयक उत्पन्न हुयी मेरी भावनाएं हैं और आपका साथ है, नहीं तो सबकुछ दिल ही दिल में ख़त्म होकर रह जाती.
Comments
Post a Comment