राजा-राम
आदि भी राम हैं
अंत भी राम हैं
कण-कण में हैं राम
पर यह राम हैं : सिया के राम
रघुपति राघव राजाराम
सहचर्य के राम
जय-जय राघव सीताराम
शालीनता के राम
जानकीरमणा सीताराम
न कि उग्रता का
'जय श्री राम'
गोयाकि किसी को नीचा दिखाना ही अभीष्ट हो।
मेरी भावनाएं आकार ले उससे पहले ही उसके गर्भपात हो जाने कि दास्तान, उल्काश्म है. जिसमें मैं हूँ, यकबयक उत्पन्न हुयी मेरी भावनाएं हैं और आपका साथ है, नहीं तो सबकुछ दिल ही दिल में ख़त्म होकर रह जाती.
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