औरतें
सभ्यता
जिस कोख़ से जन्मा होगा
वह कोख़
किसी औरत का ही रहा होगा
जैसे जनना औरत होना है
और औरत होना पूर्ण होना है
वैसे ही;
सभ्य होना
और कुछ नहीं औरत होना है
तुम्हारे लहजे में वह
देवी भी हो सकती है
और रंडी भी
असभ्यताओं के दौर में
उसी सभ्यता को आज भी
औरतें जन्म दे रही हैं.
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