प्रेम की भाषा
उसने पूछा
तुम प्रेम करते हो तो बताओ
मैं क्या हूं तुम्हारे लिए !
कई उपमाओं और
प्रतिमानों से गुजरते हुए मैंने कहा
मेरी भाषा
मेरी भाषा हो तुम
एक चुप्पी छा गई
फिर तलछट की चीजें
सिमटकर धुरी पर आ गई
और हमने एक दूसरे को
मौन में समझा
चुप्पी तोड़ते हुए
उसने कहा
एक दिन हम खत्म हो जाएंगे
लेकिन भाषा नहीं
यही कह रहे हो न !
मैंने कहा कि
मैंने कहा कुछ भी नहीं है
बस किया है
और करते हुए इसे जिया है।
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