ब्लॉक /अनब्लॉक

उसने चौथी बार आज
किया है मुझे
फेसबुक पर अनब्लॉक
इसमें है निहित
इतने दफे मैंने है पहुँचाई
उसकी भावनाओं को ठेंस.

यूँ तो अनगिनत बार
वो करती रही है हँसकर
मेरी गलतियों को स्वीकार
पर इतनी दफे हुआ है मुझसे
खंडित उसका विश्वास.

इस दरम्यान बदले हैं
मायने रिश्तों के ; आज
भेजी है उसने फ्रेंड रिक्वेस्ट
इसमें है निहित
उसने चाहा है मुझे टूटकर.



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