शूल
ऐसा नहीं है कि
शूल सिर्फ
मेरे ही हिस्से हैं
तुम्हारे हिस्से भी हैं
इसलिए
तुम्हारी और मेरी बातें
अक्सर
हमारी हो ही जाती हैं
हमारी
स्मृतियां शेष हैं
ऐसे जैसे
बारिश के बाद
बबूल में
आ जाते हैं
नए कांटे
ये जब भी उगते हैं
विदीर्ण करते हैं
उस पल को
और फिर
हमारा ह्रदय
लहू हो जाता है
हो जाता है न !
Awesome bhai....
ReplyDeleteThank you Bhai
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