ढ़लती उम्र

काश !
ढ़लती उम्र हो जाती कैद
इन्हीं अंकों में
स्थिर,नियत,स्थाई
तेरे-मेरे दरम्यान ;



शब्दों की गुंजाइश न रहती
पलकों में अपनी बातें होती

पर ये काश, काश ! है
उम्र की बढ़ती रेखा भी क्या है
जीवन रेखा का व्युत्क्रम ही तो.
______________________

Comments

Popular Posts