गुरु का जाना
कालचक्र के
इस घटाटोप
निराशा के भंवर में
जब चहुँओर मातम ही है
फिर भी,
गुरु; एक आपके जाने से
वेदना इतनी
की...
अब मौन हूं।
मेरी भावनाएं आकार ले उससे पहले ही उसके गर्भपात हो जाने कि दास्तान, उल्काश्म है. जिसमें मैं हूँ, यकबयक उत्पन्न हुयी मेरी भावनाएं हैं और आपका साथ है, नहीं तो सबकुछ दिल ही दिल में ख़त्म होकर रह जाती.
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