वृक्ष/पेड़-पौधे
मैंने बीज बोए हैं
बंजर जमीन पर
बीज ने अपना आकार लिया है
नन्हें कोपलों में इसके पंख उगे हैं
जैसे कि किसी पर
नेमतों की बारिश हुई हों
इसकी बस एक आहट से
बंजर हरा हो गया है
जब यह पूर्ण आकार लेगा और
बनेगा पौधा...
पौधा से फिर वृक्ष
हमें और हमारी पीढ़ी को
अपने आखिरी कतरे तक देता रहेगा नेमतें
पहले सांसें
फिर फूल, फल, छाया, आसरा
और अंत में अपनी अस्थि भी
करने हमारे देह को भस्मीभूत
धरती के किसी कोने पर
आओ आज फिर बीज बोएं
कोई पेड़ लगाएं
जो बने एक रोज वृक्ष।
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