जो याद रहता है
पौधे को
पानी याद रहता है
बारिश नहीं
बारिश को
टूटकर बरसना याद रहता है
बादल नहीं
बादल को
बूंदें संभालना याद रहता है
स्त्रोत नहीं
ठीक उसी तरह
प्रेम को
समर्पण याद रहता है
विशालता नहीं
मुझे
पौधे, पानी
बारिश, बादल
और प्रेम
विविध रूपों में
तुम्हारे ही रूपक लगते हैं ।
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