षड्यंत्र
राजा
अपने ही खिलाफ
ला रहा है कानून
वह खुद ही
अपना भ्रष्टाचार बताएगा
फिर
खुद को करेगा गिरफ़्तार
इस कौतूहल से
प्रजा में
राजा की जयजयकार है
बस
मुट्ठी भर मूर्ख लोग हैं जो
इसे समझ रहे हैं षड्यंत्र
जबकि
प्रजा की बहुमत
तय करती है सत्ता
और
राजा को पता है
प्रजा को मत्त रखने की तरकीब।
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