मिस्ड कॉल..

१. मिस्ड कॉल था आया
जिसकी थी मुझे प्रतीक्षा |
अलसाई सी शुरू हुयी थी
फिर रोजमर्रे की बातें जिसका 
कोई सिरा नहीं था .
आज फिर दूध ख़त्म था और
चाय की यादें उबल रही थी .
हाँ रेलवे क्रासिंग पर तुम्हारा फिसलना
अब भी खटक रहा था .
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२. जवां होने लगी बातें फिर
रात के दूसरे पहर में ,
किया संक्षेपण दिन के घटनाक्रम का
हुए सहमत की खड़ा होना
सरकार के खिलाफ ,
देशद्रोह नहीं है .
लोकतंत्र जीवित है ,न्याय मौन नहीं है .
इसी दरम्यान मेरी किसी बात पर
तुम्हारी हंसी की खनक
खिंच ले गयी मुझे यादों के जंगल में ,
जब पहली बार तुम्हारी हंसी सुनी थी मैंने ,
फोन पर.
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३. है रात का तीसरा पहर .
हमारी बातों के तंतु खिंचने लगे हैं
कुछ तल्खियाँ बढीं वज़ह- बेवजह
जैसे लील लेगा रिश्ते को
उम्र के तीसरे पड़ाव की तरह.
-हुए खामोश दोनों प्रतीक्षारत .
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कोसा उस निगोड़ी काली अमावस को
खेली जिसने ये कुटिल चाल
एक दुसरे से हमने मांगी माफ़ी
कहा रात का फिर शुभ विदा, यूँ ख़त्म हुयी हमारी बात .
-फिर मेरे मिस्ड कॉल के ठीक पंद्रहवे मिनट
मिस्ड कॉल था आया
जिसकी थी मुझे प्रतीक्षा.

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