उम्मीद..


इस उम्मीद से धरती
ज़ज्ब रखती अपने अन्दर
तपन तप्त पिघले शीशे सी
कि ______
जीवन है मधुरतम 
ऊपर जीवन के फूल खिले रहेंगे.


प्रेम भी तो अपने अन्दर
ज़ज्ब रखता है अनगिनत
खट्टे-मीठे लम्हों के उद्गार
कि ______
जीवन है प्रेम
यूँ ही प्रेम के फूल खिले रहेंगें.

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