संगम
सुबह की पहली किरण से
सबके पाप हरती संगम
तुम
रात के तीसरे पहर में
एक खामोश का अफ़साना
अपने लिए भी
बुनती तो होओगी न !
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मेरी भावनाएं आकार ले उससे पहले ही उसके गर्भपात हो जाने कि दास्तान, उल्काश्म है. जिसमें मैं हूँ, यकबयक उत्पन्न हुयी मेरी भावनाएं हैं और आपका साथ है, नहीं तो सबकुछ दिल ही दिल में ख़त्म होकर रह जाती.
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