द्वंद्व/Conflict
बच्चे एचना-पोठी होते हैं
जिस गड्ढ़े में डाल दिया
उसमें वो उछलते-कूदते रहते हैं
खुश रहते हैं
फिर यहाँ से निकालकर उन्हें
तालाब में डालते हैं
तब भी बच्चे एचना-पोठी होते हैं
उसमें वो उछलते-कूदते रहते हैं
खुश रहते हैं
अब यहाँ से निकलकर वो
नदी में आते हैं
तब भी बच्चे एचना-पोठी होते हैं
पर अब बच्चे एचना-पोठी नहीं रहते
अपना कुनवा खुद बनाते
शिकार नहीं वो शिकारी होते
हा! विडम्बना
सारे उद्यम उसे फिर से तालाब में डालने की होती है
वह वापस तालाब नहीं आता
लौटता है तो अक्सर मर सा जाता है
कमोबेश यह किस्सा पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है.
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