निशानी

न तेरे हाथों की 
न मेरे हाथों की 
दरअसल हाथों कि अंगुलियाँ भला कब एक सी हुयी है 
एक करने के चक्कर में अंगुलियाँ काट तो नहीं लेते न !

मुग़लों की निशानी 
उसे मिटा देने का मतलब है कि
हम नहीं चाहते की आने वाली पीढ़ी यह जाने कि 
कोई था जो यहाँ आया था, यहीं मोहब्बत भी की थी और यहीं का हो भी गया था

जो इतिहास है अब 
हम उसे छेड़ रहे हैं 
एक दिन हम भी इतिहास होंगें 
कोई और 
छेड़ रहा होगा हमें.     

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