प्रेम
फूल खिले,
कहीं दूर...
वहीं पड़े थे शूल.
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वहीं पड़े थे शूल.
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फूल खिले,
कहीं दूर...
वहीं पड़े रहे शूल.
वहीं पड़े रहे शूल.
मेरी भावनाएं आकार ले उससे पहले ही उसके गर्भपात हो जाने कि दास्तान, उल्काश्म है. जिसमें मैं हूँ, यकबयक उत्पन्न हुयी मेरी भावनाएं हैं और आपका साथ है, नहीं तो सबकुछ दिल ही दिल में ख़त्म होकर रह जाती.
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