अकाय
तम के गह्वर
को चीरते
नई कोपलें आई
दर्द सिक्त चेहरों पर
खिले गुलाब सी
रंगत लाई
और,
उसके रोने में
हमनें
नेमतें सारी पाई।
मेरी भावनाएं आकार ले उससे पहले ही उसके गर्भपात हो जाने कि दास्तान, उल्काश्म है. जिसमें मैं हूँ, यकबयक उत्पन्न हुयी मेरी भावनाएं हैं और आपका साथ है, नहीं तो सबकुछ दिल ही दिल में ख़त्म होकर रह जाती.
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