ग़र तुम न होती

वर्ण न होते शब्द
ग़र तुम न  होती

शब्द खोते अर्थ
ग़र तुम न होती

अर्थ रहता अव्यक्त
लगा हो जैसे ग्रहण
ग़र  तुम  न होती

मौन होता अभिष्ट 
ग़र   तुम न  होती

तुम हो,  वर्ण हैं 
शब्द हैं, अर्थ हैं 
और यही अभिष्ट भी।

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