दंगा/Violence
नफ़रत का अचानक
उन्माद में ऐसे बदलना
कि आत्मा उस क्षण भर को शून्य हो जाए
और हिंसा सामने नंगा आए
दंगा है.
लेकिन
केवल यही दंगा नहीं है
उन्माद उतरता है
और
सब मुक्त हो जाते हैं
...
बस आहत मन कभी मुक्त नहीं होता
वह ताउम्र पीछा करती है
एक दंगा अनवरत चलता रहता है
दंगाई के अंतरतम में.
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