तेरे मेरे दरम्यान

एक डोर है उलझा
तेरे मेरे दरम्यान
जिसका सिरा मिलता नहीं

हाँ अक्सर ही
एक धागा मिल जाता है सीधा
यूँ लगता है कि रिश्तों की डोर
बस सुलझ ही गया

तभी अचानक
उसमें गिरहें उग आती हैं
और
डोर अनसुलझा ही रह जाता है
तेरे मेरे दरम्यान.

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