उम्मीद

हर दौर में यह होता है 
जब 
अविश्वास विद्वेष धर्म और उन्माद की फसलें काटी जाती हैं
हिंसा के हंसिए से

और
इसी दरम्यां
कोई बो रहा होता है बीज गुलाब का
इस उम्मीद से कि 
एक दिन फूल खिलेंगे.

Comments

Popular Posts