चांद मुबारक

जब मुल्क़
राम और ख़ुदा के 
एक सांचे से जुदा 
चांद की चांदनी में भी सुलगने लगा है
जिसमें अब राम केवल मेरे हो गए हैं
जैसे ख़ुदा तुम्हारे
और दोनों में है अब वैर

तब तुम्हीं बताओ
किस नूर की ख़ातिर
कहूं तुम्हें चांद मुबारक़!

दोस्त,
हमारा चांद खो गया है
किसी स्याह रात में

जब हम मिलकर इसे ढूंढ लेंगे 
तब हमारा चांद मुबारक होगा।

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