Lockdown/दीया जलाएं
मुल्क़ की आवाम का एक तबका
जब सड़क पर भूख
और परित्यक्त होने की टीस से उबरने की कोशिश में
पैदल मार्च पर
अपनी मिट्टी की ओर था
जो हुक्मरान के उस अचानक आदेश से उत्पन्न हुआ
जिसमें उसे देश नहीं माना गया
और कोरोना वारियर्स
इस अदृश्य जंग से लड़ने उचित संसाधन मांग रहे थे
तब हुकूमत
रात के नौ बजे नौ मिनट दीया जलाने कहता है
ताकि यह उस आवाम के संकल्प का भी महाजागरण है
ऐसा भ्रम
इस प्रकाश से बाहर बना रहे
उठने वाले सवाल यूं दबा रहे।
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