साथ तेरे
शब्द गूंजते हैं
गूंजते रहते हैं हमेशा ही
ब्रह्मांड में
युगों युगों तक
अक्षय
जैसे चांद-सूरज
नदियां पहाड़
...और प्यार
तुम
शब्द हो मेरे
यही तो कहा था न तुमसे
पहली मुलाकात में..
इस दरम्यान
शब्दों ने अर्थ पाए
और अर्थ ने अपरा, अकाय
फिर भी लगता है
हर बार
की जैसे
पहली मुलाकात है।
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