राजा को बुद्ध होना है
प्राणी
जन्म भर
दु:खों की श्रृंखला में रहता है
तृष्णा 'समुदय' है
और
तृष्णा का अशेष प्रहाण 'निरोध'
राजा के पास 'मार्ग' है
वह प्रजा से कहता है
त्याजने तृष्णा
और
इसके बदले प्रजा को
राजा से मिलेगा 'करुणा'
राजा को अब 'बुद्ध' होना है.
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