निकम्मा तंत्र
जिसे पुश्तैनी के नाम पर
मिली हो खंडहर इमारत
वो भी ऐसे
जैसे कि यह हासिल हुआ हो
कोर्ट में 'टाइटल सूट' सी चली
बेहद लंबी और थकाऊ प्रक्रिया के बाद
जिसमें मिल तो जाता है
लेकिन इस मिलने की कीमत में
बहुत कुछ फिसल जाता है हाथ से
इमारत में धीरे-धीरे
ईंट-गाड़ा रंग-रोगन किया जाता रहता है
अपनी क्षमता के तई
गिरते-पड़ते संभलते
फिर कालांतर में
एक नई पीढ़ी आती है
वह इस ईंट-गाड़े को बेचकर खाने लगता है
और डंके की चोट पर यह कहता भी है कि
पुश्तों ने संपत्ति को खोखला कर दिया है
गोयाकि उसके पास बेचने के लिए इतना ही क्यों है!
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