अव्यक्त

बहुत कुछ है जो
कहना चाहता हूँ
पर अक्सर शब्द मौन होते हैं
और सब अव्यक्त रह जाता है
सुख-दुःख  हँसी-ख़ुशी
... और मेरा प्यार भी.





फिर ...
भावनाओं के घुमड़ते सागर के बीच फँसी
दिल की नौका के पाल को
आहिस्ता से समेटता हूँ,
उसपर हाथ रख लेता हूँ.   

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