इंतजार

एक दिन तुम्हारी भी मृत्यु होगी
कर दिए जाओगे दफ़न या फिर राख
हर स्थिति में मिलना होगा तुम्हें मिट्टी में
फिर उस मिट्टी में उगेंगे पौधे
और तुम फिर खिलोगे उस पौधे के फूल में.



मंदिर से लेकर मज़ार तक
चर्च से लेकर गुरूद्वारे तक
तुम बिखेरोगे अपनी सुगंध.

देख लेना तब ...
तुम्हारा कोई मज़हब नही होगा
और न ही तुम रखोगे किसी से बैर
तुम खिलोगे मुरझाओगे तोड़े जाओगे
होओगे औरों की ख़ुशी के लिए उत्स
पर तुम करते हो इसके लिए
शायद अपनी मृत्यु का इंतजार. 

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