आज फिर..
याद है तुम्हें एक दिन जब
मद्धम बारिश हो रही थी
तुम अपने बालकॉनी से
सामने के पार्क में फुटबॉल खेल रहे
बच्चों को देख रही थी
और तुम्हारा मन वहीं भींग रहा था
मैंने तुम्हे कॉल किया था
तुम बहुत खुश थी और
बातों के बीच में तुम पुराने गाने गुनगुना रही थी
वही जो अक्सर तुम एफ.एम पर सुनती रहती हो
मुझे बरसों पहले पढ़ी एक नॉवेल की हीरोइन
जो अलमस्त सी थी, यकबयक याद हो आया था
लगा कि वो भी बिल्कुल तुम सी ही रही होगी.
और तभी अचानक बिजली के कड़कने से
तुम डरकर बालकॉनी से भागी थी
अपने रूम के अन्दर
तुम्हारी साँसे तेज हो गयी थी
पर मैंने सर्द महसूस किया था अपने भीतर.
आज फिर मद्धम बारिश हो रही है
.......आज फिर बिजली कड़की है.
मद्धम बारिश हो रही थी
तुम अपने बालकॉनी से
सामने के पार्क में फुटबॉल खेल रहे
बच्चों को देख रही थी
और तुम्हारा मन वहीं भींग रहा था
मैंने तुम्हे कॉल किया था
तुम बहुत खुश थी और
बातों के बीच में तुम पुराने गाने गुनगुना रही थी
वही जो अक्सर तुम एफ.एम पर सुनती रहती हो
मुझे बरसों पहले पढ़ी एक नॉवेल की हीरोइन
जो अलमस्त सी थी, यकबयक याद हो आया था
लगा कि वो भी बिल्कुल तुम सी ही रही होगी.
और तभी अचानक बिजली के कड़कने से
तुम डरकर बालकॉनी से भागी थी
अपने रूम के अन्दर
तुम्हारी साँसे तेज हो गयी थी
पर मैंने सर्द महसूस किया था अपने भीतर.
आज फिर मद्धम बारिश हो रही है
.......आज फिर बिजली कड़की है.
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