जीवन
छुक - छुक रेल चले जीवन की
करती मीठी शोर
कठिन डगर पर
डटे पथ पर
वक़्त से करती होड़
जब रास्ते पड़ जाए सिग्नल
थम सा जाए ये शोर.
मेरी भावनाएं आकार ले उससे पहले ही उसके गर्भपात हो जाने कि दास्तान, उल्काश्म है. जिसमें मैं हूँ, यकबयक उत्पन्न हुयी मेरी भावनाएं हैं और आपका साथ है, नहीं तो सबकुछ दिल ही दिल में ख़त्म होकर रह जाती.
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