यकीन


जब अंधेरा घुप्प घना 
रातें लंबी होती हैं
और यह लगने लगता है कि
शायद यही नियति है अब
तभी तम के सीने को चीरते हुए सूर्य निकलता है
और ज़र्रा-ज़र्रा रौशन होता है

यह एक रवायत है दरअसल कि
ऐसा होना ही होता है 
ताकि ...
अन्याय पर न्याय
घृणा के ऊपर प्रेम
और पराजय के बाद जय में
यकीन बना रहे

यही यकीन एक चींटी तक को अदम्य साहस से भर देता है
वह हाथी से टकरा जाती है।


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