रंगोली

तुम्हारे हर लफ्ज़ों में
एक उत्सव है
एक स्पंदन है
एक रंग है
सुर्ख, धानी, श्वेत
कुछ श्याम, और
रंगों के युग्म भी
जिसे मैं
सहेजता गया
अपने अंतस में,
अब इस कैनवास पर
रंगोली उभर आया है.   

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