आदमी

मैं नही जानता हूँ
शाखों पर बसे आनंद
जीवन का संगीत

मैं नही जानता हूँ
उन हाथों को जिसने बोए हैं बीज
और कैसे उगाये हैं फसल

मैं नहीं जानता हूँ
दिल के महासागर में
भावनाओं की कश्ती को

मैं जानता हूँ चुकाना
सबका रुपयों में मोल
______मैं आदमी हूँ.

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