मिट्टी हूँ मैं
मिट्टी हूँ मैं
बोता रहा हूँ प्यार का बीज
अपने दिल कि जमीं पर
पर वो सारे बीज जस के तस थे
फिर एक रोज
तुम्हारी आहट हुयी
बीजों ने अपनी आँखें खोली
देखे कुछ सुनहले सुरखाब
सोचा साथ अब
खुशियों की फसल उगायेंगें
और तुम कि... हो
समुन्दर किनारे रेत पर लिखी गज़ल
पर कमबख्त आज भी वो
अपनी आँखों में तुम्हारी राह देखता है
तुम्हारा होना
उनमें फूल खिलने कि शर्त है
मैं तो हूँ केवल मिट्टी
तुम हो हवा धूप पानी.
बोता रहा हूँ प्यार का बीज
अपने दिल कि जमीं पर
पर वो सारे बीज जस के तस थे
फिर एक रोज
तुम्हारी आहट हुयी
बीजों ने अपनी आँखें खोली
देखे कुछ सुनहले सुरखाब
सोचा साथ अब
खुशियों की फसल उगायेंगें
और तुम कि... हो
समुन्दर किनारे रेत पर लिखी गज़ल
पर कमबख्त आज भी वो
अपनी आँखों में तुम्हारी राह देखता है
तुम्हारा होना
उनमें फूल खिलने कि शर्त है
मैं तो हूँ केवल मिट्टी
तुम हो हवा धूप पानी.
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