जिंदगी-खूबसूरत

जिंदगी
वैसे तो कम खूबसूरत कभी नहीं रही
तुमसे मिलने के बाद
तुम्हारा होने के बाद

जैसे जैसे वक्त का लम्हा गहराया
इन गहराते लम्हों के दामन में
तुम और सुर्ख़ होती गयी
मेरे जेहन में मेरे जज्बात में
मेहंदी जैसे और सुर्ख हो जाती है रचने के बाद

एक रोज तुमने कहा था मुझे
तेरी धड़कनों में धड़कने लगा मेरा नज़्म है
तुम्हारा सुर्ख़ रंग तभी से मेरा रंग है

झूठ है कहना कुछ और भी है इस जहां के बाद
जिंदगी
वैसे तो कम खूबसूरत कभी नहीं रही
तुमसे मिलने के बाद
तुम्हारा होने के बाद

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