जब दीप जले आ जाना

जीवन में फूल खिले
तुमसे ही
नज़्मों में मेरे अज़ान घुले
अपरा तुम भद्रा तुम
दिशाएं भी हो गईं पाजेब तुम्हारा
रंगोली रूह का
उसमें एक दिया माटी का
कर रहा इन्तजार तुम्हारा
जब दीप जले आ जाना.

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