प्रसव-पीड़ा

पीड़ा ऐसी की
चेतन भी हो बेसुध

फिर भी

आँसू ढलकते
आंखों की कोर से

लेकिन,

सुध आते ही
धीरे से मुस्कुरा देती है

चंद लम्हों में
जो बनने वाली है माँ।

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