प्रसव-पीड़ा
पीड़ा ऐसी की
चेतन भी हो बेसुध
फिर भी
आँसू ढलकते
आंखों की कोर से
लेकिन,
सुध आते ही
धीरे से मुस्कुरा देती है
धीरे से मुस्कुरा देती है
चंद लम्हों में
जो बनने वाली है माँ।
मेरी भावनाएं आकार ले उससे पहले ही उसके गर्भपात हो जाने कि दास्तान, उल्काश्म है. जिसमें मैं हूँ, यकबयक उत्पन्न हुयी मेरी भावनाएं हैं और आपका साथ है, नहीं तो सबकुछ दिल ही दिल में ख़त्म होकर रह जाती.
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