जेएनयू
वैचारिक असहमती को कुचलना जब राष्ट्रवाद का गहना समझा जाने लगे
संख्याबल सजदा करने का मानक
और धर्म जब सब जरूरतों पर पड़े भारी
तब जामिया होता है, अलीगढ़ होता है, ननकाना होता है
जेएनयू होता है।
मेरी भावनाएं आकार ले उससे पहले ही उसके गर्भपात हो जाने कि दास्तान, उल्काश्म है. जिसमें मैं हूँ, यकबयक उत्पन्न हुयी मेरी भावनाएं हैं और आपका साथ है, नहीं तो सबकुछ दिल ही दिल में ख़त्म होकर रह जाती.
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