गांधी
हिंसा का समर्थन
या फिर उसे किसी सूरत में न्यायोचित ठहराने की कोशिश करने वाले
गांधी की समाधि पर
यह देखने जाते हैं कि गांधी अब कितने जीवित हैं!
बस,
वैचारिक रस्खलन में
वे यह स्वीकार नहीं करते कि
गांधी एक दरख़्त हैं
जहां वे भी अपने विकट मुश्किलों में ओट लेते हैं.
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