बापू-गांधी
बापू तुम अमर हो
इसलिए नहीं कि तुमने सत्य और अहिंसा की जो राह पकड़ी थी उस पर ही अंत तक चलते रहे
और इसलिए भी नहीं कि तुमने जंग में भी अंत तक अपनी मर्यादा बनाए रखा जबकि मर्यादा पुरुषोत्तम तक ने भी बाली पर छुपकर वार किया था
और इसलिए भी नहीं कि तुम अंत तक सबके लिए घिसते रहे, रिसते रहे और गलते रहे
इसलिए भी अमर नहीं हो गए कि तुम इस मुल्क़ के नींव का ईट हो, अक्सर नए उरूज में नादां नींव को खोदने लगते हैं
बापू तुम अमर हो
इसलिए कि तुम आज भी रोज जिनके हाथों मारे जा रहे हो उसकी भी पहचान को तुम ओट देते हो जब गैर मुल्क़ में पहचाने जाने के संकट से वे जूझते हैं
इसलिए कि तुम आज भी रोज जिनके हाथों मारे जा रहे हो उसकी भी पहचान को तुम ओट देते हो जब गैर मुल्क़ में पहचाने जाने के संकट से वे जूझते हैं
तुम अमर इसलिए भी हो कि तुमने आज भी अपनी मिट्टी की रवायत नहीं छोड़ी है।
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