गलियाँ शाश्वत है

गावँ की गलियों से होते हुए
आते हैं हम और खो जाते हैं
शहर की गलियों में; बस
फासला गावँ और शहर का है
गलियाँ शाश्वत है.

उम्र के किसी मोड़ पर
याद आती है जब अपनी जड़
होता है लौटना
शहर से गावँ की गलियों में
यहाँ भी ; बस
फासला शहर और गावँ का है
गलियाँ शाश्वत है.

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