गर तुम न होती
वर्ण न होते शब्द
गर तुम न होती
शब्द खोते अर्थ
गर तुम न होती
मौन रहता अव्यक्त
हो जैसे चंद्र-ग्रहण
गर तुम न होती
तुम हो, मेरी रातें भी चाँदनी रातें हैं.
मेरी भावनाएं आकार ले उससे पहले ही उसके गर्भपात हो जाने कि दास्तान, उल्काश्म है. जिसमें मैं हूँ, यकबयक उत्पन्न हुयी मेरी भावनाएं हैं और आपका साथ है, नहीं तो सबकुछ दिल ही दिल में ख़त्म होकर रह जाती.
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