जीवन है प्रेम
इस उम्मीद से धरती
ज़ज्ब रखती अपने अन्दर
तपन तप्त पिघले शीशे सी
कि
जीवन है मधुरतम
ऊपर जीवन के फूल खिले रहेंगे.
ज़ज्ब रखती अपने अन्दर
तपन तप्त पिघले शीशे सी
कि
जीवन है मधुरतम
ऊपर जीवन के फूल खिले रहेंगे.
प्रेम भी तो अपने अन्दर
ज़ज्ब रखता है अनगिनत
खट्टे-मीठे लम्हों के उद्गार
कि
जीवन है प्रेम
यूँ ही प्रेम के फूल खिले रहेंगें.
ज़ज्ब रखता है अनगिनत
खट्टे-मीठे लम्हों के उद्गार
कि
जीवन है प्रेम
यूँ ही प्रेम के फूल खिले रहेंगें.
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