गुजिश्ता साल
यूँ तो कितने ही साल बीते थे
पर पिछले साल ही में
पत्थर पर बीज जमे थे
पत्थर पर बीज जमे थे
इस साल
बीजों ने अपनी आंखे खोली
बीजों ने अपनी आंखे खोली
आज
साल जब अपने उफ़क पर है
साल जब अपने उफ़क पर है
तो,
इस बंजर जमीं पर पौधे उग आए हैं
जिसमें तुम्हारे रंग का ही फूल खिला है.
इस बंजर जमीं पर पौधे उग आए हैं
जिसमें तुम्हारे रंग का ही फूल खिला है.
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